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Published August 26, 2020 by with 0 comment

Pomodoro Technique समय प्रबंधन का प्रभावी तरीका

क्या आप किसी Work को  लम्बे समय तक नहीं कर पाते ?

जब भी आप कोई काम करते हैं तो कुछ देर बाद बोर होने लगते हे जिसका असर आपके रिजल्ट पर पड़ता हे

पोमोडोरो तकनीक का इस्तेमाल करके आप बहुत कम समय में ज्यादा  वर्क कर सकते हैं।

पोमोडोरो तकनीक क्या है –  What is POMODORO TECHNIQUE 

Pomodoro Technique एक ऐसी टाइम मैनेजमेंट तकनीक है जिसकी सहायता से आप घण्टों तक अधिक कार्य कुशलता के साथ बिना बोर हुए एकाग्रता के साथ कार्य कर सकते है 

POMODORO TECHNIQUE


पोमोडोरो तकनीक करने का तरीकाHOW TO POMODORO TECHNIQUE

इस तकनीक में समय को ऐसे छोटे-छोटे अंतरालों में बांटा जाता है जिससे प्राप्त की जा सके। इस तकनीक में समय को 25-25 मिनट के अंतरालों में तोड़ लिया जाता है और हर 25 मिनट के बाद 5 मिनट का Break लिया जाता है।

25 मिनट तक फोकस होकर काम करने को एक पोमोडोरो कहा जाता है। इस तरह आप चार पोमोडोरो तक काम करिये। और हर पोमोडोरो ख़त्म होने के बाद 5 मिनट का ब्रेक लीजिये।

और चौथा पोमोडोरो ख़त्म होने के बाद एक बड़ा ब्रेक 15 मिनट या आधे घण्टे का लीजिये।

पोमोडरो तकनीक से सम्बंधित ऐप आपको प्ले स्टोर में मिल जायेंगे आप उनका इस्तेमाल भी कर सकते हैं

Pomodoro Timer Lite एक बेहतरीन एंड्राइड एप्प हे जिसे आप इस्तेमाल कर सकते हैं

आप अपनी Capacity के हिसाब से इसे 5-15 मिनट तक घटा या बढ़ा भी सकते हैं

आपको यहाँ ध्यान रखना हे की ब्रेक लेते टाइम आपको एक जगह बैठना नही है। आप कुछ भी कर सकते हैं टहल भी सकते हैं।

एक रिसर्च से यह साबित हुआ कि इंसान का दिमाग 25 मिनट तक ही प्रोडक्टिव और full कंसन्ट्रेशन के साथ काम कर सकता हे 25 मिनट के बाद हमारे दिमाग की प्रोडक्टिविटी कम होने लगती हे

आप इस तकनीक का इस्तमाल करके अगले 25 मिनट का पोमोडोरो लेकर full कंसन्ट्रेशन के साथ काम कर सकते हे और अपने टारगेट को जल्दी पूरा कर सकते हैं।

पोमोडोरो तकनीक के फायदे: Advantages of Pomodoro Technique Hindi

  1. इसकी मदद से आप अपने गोल को जल्दी और आसानी से अचिव कर सकते है
  2. पोमोडोरो तकनीक से पढ़ाई या कार्य पर फोकस रहने में आसानी होती है।
  3. पोमोडोरो तकनीक से समय का सदुपयोग कर सकते है।
  4. इस तकनीक का इस्तेमाल करने से अधिक अनुशासित बन सकते हैं।


 

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Published August 15, 2020 by with 0 comment

Jaguar Land Rover सफलता की कहानी

अक्सर आम लोग अपमान का बदला तत्काल ले लेते हैंलेकिन महान लोग उसे अपनी सफलता की सीढ़ी बना लेते हैं।

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बात तब की है जब टाटा समूह ने 1998 में टाटा इंडिका कार बाज़ार में निकली थी|

यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था और इसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत भी की थी

टाटा इंडिका कार को मार्किट में रिस्पोंस अच्छा नहीं मिला| जिस कारण से कुछ सालो में टाटा मोटर्स घाटे में जाने लगी

तब कुछ करीबी लोगों और साझेदारों ने रतन टाटा को अपना कार व्यापार में हुए नुकसान की पूर्ति के लिए अपना कार व्यापार किसी और कंपनी को बेचने का सुझाव दिया

रतन टाटा ने भी यह सुझाव ठीक समझा|

वे साझेदारों के साथ अपनी कार कंपनी बेचने का प्रस्ताव फोर्ड कंपनी के पास लेकर गए| फोर्ड कंपनी अमेरिका में बनने वाली कारों का केंद्र थी|

फोर्ड कंपनी के साथ रतन टाटा और उनके साझेदारों की मीटिंग करीब तीन घंटे तक चली| फोर्ड कंपनी के चेयरमैन बिल फोर्ड ने रतन टाटा के साथ कुछ रुखा व्यव्हार किया और बातों ही बातों में ये कह दिया कि “जब तुम्हे इस व्यापार के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो फिर तुमने इस कार को लांच करने में इतना पैसा क्यूँ लगाया. हम तुम्हारी कंपनी खरीद कर तुम पे बहुत बड़ा अहसान करने जा रहे हैं |

मीटिंग के बाद रतन टाटा (Ratan Tata) ने तुरंत वापस लौटने का फैसला किया| और वे बिना डील फाइनल किए रत को हि भारत वापस आ गये

फोर्ड की बात रतन टाटा के दिल पे लग गयी और उन्होंने टाटा मोटर्स को सफल बनाने के लिए अपना जी जान लगा दिया

कुछ ही वर्षों में  रतन टाटा का कार बिज़नेस एक अच्छी खासी लय में आगे बढने लगा और बेहद मुनाफे का व्यवसाय साबित हुआ|

वहीँ दूसरी तरफ फोर्ड कंपनी (Ford Motors) नुकसान मैं जा रही थी|

फोर्ड कंपनी सन 2008 के अंत तक लगभग दिवालिया होने की कगार पर थी|

तब रतन टाटा ने फोर्ड कंपनी के सामने उनके लक्ज़री कार ब्रांड जैगुआर-लैंड रोवर (Jaguar Land rover) को खरीदने का प्रस्ताव रखा और बदले में फोर्ड को अच्छा ख़ासा दाम देने की पेशकश की|

 चूँकि बिल फोर्ड पहले से ही जैगुआर-लैंड रोवर की वजह से घाटा झेल रहे थे तो उन्होंने यह प्रस्ताव सहर्ष स्वीकार कर लिया|

 बिल फोर्ड बिल्कुल उसी तरह अपने साझेदारों के साथ बॉम्बे हाउस (बॉम्बे हाउस टाटा समूह का मुख्यालय है) पहुंचे जैसे कभी रतन टाटा बिल फोर्ड से मिलने उनके मुख्यालय गए थे|

मीटिंग में ये तय हुआ कि जैगुआर-लैंड रोवर ब्रांड 9300 सौ करोड़ में टाटा समूह के अधीन होगा और वेसा ही हुआ|

इस बार भी बिल फोर्ड ने वही बात दोहराई जो उन्होंने मीटिंग में रतन टाटा से कही थी बस इस बार बात थोड़ी सकारात्मक थी. उन्होंने कहा की “आप हमारी कंपनी खरीद कर हम पर बहुत बड़ा एहसान कर रहे हैं 

आज जैगुआर-लैंड रोवर टाटा समूह का हिस्सा है

रतन टाटा चाहते तो उसी समय बिल फोर्ड के साथ हुई मीटिंग में उनकी बात का जवाब दे देते, लेकिन महान लोग अपनी सफलता से लोगों को जवाब दिया करते हैं। यही वो गुण है जो एक सफल और एक महान इंसान के बीच का अंतर दर्शाता है| 

मै सही फैसले ले ने में विश्वास नहीं करता बल्कि फैसले लेकर उन्हें सही साबित कर देता हु
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Published August 14, 2020 by with 0 comment

जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है ?


  आपके जीवन का लक्ष्य क्या है?

importance of goal setting
Importance of goal setting in life  


जिन्दगी में हम बिना लक्ष्य के कुछ भी नहीं कर सकते

सोचो अगर एक फुटबॉल टीम को मैदान में खेलने के लिए भेज दिया जाये लेकिन उस मैदान में गोल  करने की जगह ही नहीं बनाई  गयी हो तो क्या होगा

फुटबाल कि तरह ज़िन्दगी में भी हम  तब-तक आगे नहीं बढ़ सकते जब तक हमें  अपने लक्ष्य का पता ना हो

अर्नोल्ड एच ग्लासगो

आप सुबह अपने घर से निकलते हे तो आपको ये पता होता हे की आपको जाना कहा है अब सोचिये अगर आपको ये नही पता होगा की जाना कहा हे तो इधर उधर भटकते रह जायेंगे और परेशान हो जायेंगे

1979 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में छात्रों पर एक शोध किया गया

उनमे कुछ छात्र बहुत मेधावी थे और कुछ सामन्य थे

सभी को एक जगह बुला कर उनसे पूछा की  "क्या आपने अपने भविष्य के लिए स्पष्ट, लिखित लक्ष्य निर्धारित किए हैं और उन्हें पूरा करने की योजना है?

84% लोगो के पास कोई निश्चित लक्ष्य नहीं था

13% लोगो के पास लक्ष्य तो थे पर वे लिखित में नहीं थे

3% छात्र ऐसे थे जिन्होंने अपना एक लक्ष्य बनाया हुआ था

10 साल बाद 1989 में दोबारा उन छात्रों  को बुलाया और उनसे उनके जीवन के बारे में पुछा गया  

तो  रिसल्ट सामने आये  वो  चौकाने वाले थे

13 प्रतिशत छात्र, जिनके लक्ष्य लिखित में नही थे, उनकी आय उन 84 प्रतिशत के आय से औसतन 10% ज्यादा थी जिनके पास कोई लक्ष्य नहीं था

और वे 3% लोग जिनका लिखित लक्ष्य था उनकी आय औसतन दोगुनी थी उन 84% लोगो से जिनके कोई लिखित लक्ष्य नहीं थे

जबकि वे 84% लोग आज भी कही न कही संघर्ष कर रहे थे

वह लोग जिनके स्पस्ट , लिखित लक्ष्य होते हैं, वह कम समय में दुसरे लोग जितना सोच भी नहीं सकते उससे कहीं ज्यादा  सफलता प्राप्त करते हैं

Brian Tracy ब्रायन ट्रेसी

सोचिये आप एक पत्र वाहित कबूतर को पिंजरे में रखते  हे और उस पिंजरे को बक्से में बंद कर दे और उस बक्से को एक गाडी में लेकर हजारो मिल चले जाये फिर उस पिंजरे से उस कबूतर को आजाद करे उड़ने के बाद वो आसमान में दो चक्कर लगाएगा और फिर अपने लक्ष्य तक पहुच जायेगा दुनिया में कबूतर के अलावा सिर्फ एक हि जीव हे जिसके पास ये लक्ष्य तक पहुचने का हुनर हे और वो हे इंसान

सफलता के इस प्रमाण के वावजूद भी ज्यादातर लोगो के पास स्पष्ट,  समयबद्ध लक्ष्य नहीं है जिस पर वे काम करते हैं

जीवन में लक्ष्य इतना महत्वपूरण हे फिर भी लोग आपना  लक्ष्य नहीं बनाते

उनके लक्ष्य न बननें के पीछे मुख्या कारण होते हे

1.वे लोग लक्ष्यों को महत्वपूर्ण नहीं मानते

ऐसा जब होता हे यदि आप ऐसे माहौल  में रहते हे जहा लक्ष्यों के बारे में कोई जानता हि नहीं हे

2. वे सोचते हे की उनके पास पहले से हि कोई लक्ष्य हे

ऐसे लोग सपनो को हि अपना लक्ष्य मान लेते हे  जैसे खुश रहना अच्छा पारिवारिक जीवन  जीना आदि

3. अस्वीकृति का दर

लोग इस बात से डरते हे की उन्होंने कोई लक्ष्य बनाया और उसे वे प्राप्त न कर सके तो लोग क्या कहेंगे


तो दोस्तों आपको करना क्या हे सबसे पहले अपने आप से ये पूछे की आप अपने जीवन में करना क्या चाहते हे और उसके हिसाब से आपना लक्ष्य निर्धारित करे

 

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Published August 01, 2020 by with 0 comment

who move my cheese


यह बुक हमें सिखाती है की परिवर्तन की वजह से हमारी लाइफ में कोई भी मुसीबत आये तो उसका सामना कैसे करे |


यह बुक समरी डोक्टर स्पेंसर जोंसन की बेस्ट सेलिंग बुक who move my cheese  पर आधारित है

जिसे 37 से ज्यादा भाषाओ मै छापा जा चुका है इस पुस्तक ने कई लोगो के जीवन मै सकारात्मक बदलाव लाये है 

एक भुल-भुलैय्या में दो चूहे रहते थे जिनका नाम था स्निफ और स्करी और दो छोटे इन्सान रहते थे जिनका नाम था हेम और हॉ  इन चारों में एक चीज़ कॉमन थी इन चारो को चीज बहोत पसंद था और जीने के लिए सबसे जरुरी भी था |

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Published July 30, 2020 by with 0 comment

दो पत्थर एक प्रेरणादायक कहानी


एक शिल्पकार कही जा रहा था चलते चलते वह थक गया

थका-माँदा शिल्पकार लंबी यात्रा के बाद किसी छायादार वृक्ष के नीचे विश्राम के लिये बैठ गया।

अचानक उसे सामने एक पत्थर का टुकड़ा पड़ा दिखाई दिया।

उसने सोचा क्यों न इसकी एक सुन्दर मूर्ति बनायीं जाये

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