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Published July 30, 2020 by with 0 comment

दो पत्थर एक प्रेरणादायक कहानी


एक शिल्पकार कही जा रहा था चलते चलते वह थक गया

थका-माँदा शिल्पकार लंबी यात्रा के बाद किसी छायादार वृक्ष के नीचे विश्राम के लिये बैठ गया।

अचानक उसे सामने एक पत्थर का टुकड़ा पड़ा दिखाई दिया।

उसने सोचा क्यों न इसकी एक सुन्दर मूर्ति बनायीं जाये


उस शिल्पकार ने उस सुंदर पत्थर के टुकड़े को उठा लिया,

 सामने रखा और औजारों के थैले से छेनी-हथौड़ी निकालकर उसे तराशने के लिए जैसे ही पहली चोट की, पत्थर जोर से चिल्ला पड़ा:- उफ मुझे मत मारो।

दूसरी बार वह रोने लगा:- मत मारो मुझे, मत मारोमत मारो"

शिल्पकार ने उस पत्थर को छोड़ दिया और आगे चल दिया वही कुछ दूर उसे दूसरा पत्थर दिखा

उसने उसे उठाया और उसे हथौड़ी से तराशने लगा।

वह टुकड़ा चुपचाप छेनी-हथौड़ी के वार सहता गया और देखते ही देखते उस पत्थर के टुकड़े मे से एक देवी की प्रतिमा उभर आई।

उस प्रतिमा को वहीं पेड़ के नीचे रख वह शिल्पकार अपनी राह पकड़ आगे चला गया।

वही पास के गाँव में एक मंदिर का निर्माण हो रहा था जब लोगो को उस मूर्ति के बारे में पता चला तो वो उस मूर्ति को उठा कर मंदिर में रख दी

कुछ वर्षों बाद जब शिल्पकार को फिर से उसी पुराने रास्ते से गुजरना पड़ा, तो देखा गाँव में मंदिर बना देखा

जब वह मंदिर में दर्शन करने लगा , तो पास आकर देखा कि उसकी बनाई मूर्ती का कितना सत्कार हो रहा है।

जो पत्थर का पहला टुकड़ा उसने उसके रोने चिल्लाने पर फेंक दिया था वह भी एक ओर में पड़ा है और लोग उसके सिर पर नारियल फोड़कर मूर्ती पर चढ़ा रहे है।

तो दोस्तों इसी तरह हम सब की जिन्दगी में भी कई परेशानिया आती हे

अब जो उन परेशानियों का सामना कर लेता हे वो जिन्दगी में सफल हो जाता हे और जो उनसे दर कर हार मान लेता हे वो असफल रह जाता हे

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